जितेंद्र को पहली फिल्म के लिए मिले थे सिर्फ 100 रुपये, 6 महीने नहीं मिली थी सैलेरी


नई दिल्ली: एक्टर जितेंद्र (Jeetendra) उन बॉलीवुड स्टार्स में हैं जिन्होंने लंबे समय तक स्टारडम देखा है. उनकी कई फिल्में सुपरहिट साबित हुई, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जितेंद्र के फिल्मी करियर का शुरुआती समय काफी संघर्ष भरा बीता है. जितेंद्र शुरुआती दिनों में मुंबई में ही चॉल में रहा करते थे. जितेंद्र कॉलेज में पढ़ते थे, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी. उनके निधन के बाद घर चलाना मुश्किल हो गया था, इसलिए जितेंद्र खुद ही काम करना शुरू करना चाहते थे.
जितेंद्र को सबसे पहले काम बतौर जूनियर आर्टिस्ट का मिला था. उन्हें यह काम फिल्ममेकर शांताराम ने दिया था. उनसे कहा गया था कि जिस दिन कोई जूनियर आर्टिस्ट नहीं आएगा, उनसे काम लिया जाएगा और इसके बदले हर महीने 105 रुपए दिए जाएंगे.

पहले ब्रेक के बदले कम पैसे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,  धीरे-धीरे जितेंद्र शांताराम को पसंद आ गए. शांताराम ने जितेंद्र को गीत गाया पत्थरों ने में साइन किया. इस फिल्म में शांताराम ने उन्हें रवि कपूर से जितेंद्र नाम दिया. जितेंद्र को फिल्म तो मिली, लेकिन ब्रेक दिया गया इसलिए पैसे कम हो गए. उन्हें हर महीने 100 पर साइन किया गया था, लेकिन शुरुआती 6 महीनों तक उन्हें पैसे ही नहीं दिए गए.

लंबे संघर्ष के बाद मिली पहचान
जितेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत में बहुत मेहनत की थी तब जाकर 1967 में फर्ज फिल्म से जितेंद्र को नई पहचान मिली. इस फिल्म का गाना ‘मस्त बहारों का मैं आशिक’ काफी पसंद किया गया था. इस तरह जितेंद्र ‘जंपिंग जैक’ बन गए थे. इसके बाद हमजोली और कारवां जैसी फिल्में उन्होंने की और वो सुपरस्टार बन गए.

बालाजी टेलीफिल्म्स और बालाजी मोशन पिक्चर के चेयरमैन
वहीं, जितेंद्र अब फिल्में की लेकिन बालाजी टेलीफिल्मस और बालाजी मोशन पिक्चर के चेयरमैन हैं. उनकी बेटी एकता कपूर ने फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री में अलग मुकाम हासिल किया है.

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